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सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

लुधियाना के 83 वर्षीय इस नौजवान को देख अच्छे बॉडी बिल्डर भी दंग रह जाएंगे

लुधियाना के 83 वर्षीय इस नौजवान को देख अच्छे बॉडी बिल्डर भी दंग रह जाएंगे


आज के समय में हर कोई फिट रहना चाहता है। खासकर जवान लड़के-लड़कियां अपनी बॉडी को लेकर कुछ ज्यादा ही संवेदनशील रहते हैं, लेकिन वो बॉडी सिर्फ जवानी तक सीमित रह जाती है। बुढ़ापा आते-आते शरीर कमजोर हो जाता है, चेहरे पर झुर्रियां आ जाती हैं और बॉडी नाम की कोई चीज तो रहती ही नहीं, लेकिन लुधियाना के मायानगर के रहने वाले 83 वर्षीय अमीर चंद की बॉडी को देखकर आपको लगेगा कि वो 83 नहीं बल्कि 38 साल के कोई नौजवान हैं। उनकी फिट बॉडी की तारीफ बड़े-बड़े फिल्मी स्टार्स ने भी की है।

दंगल फिल्म की शूटिंग के दौरान आमिर खान एक बार लुधियाना गये हुये थे, जहां उनकी मुलाकात बॉडी बिल्डर अमीर चंद से हुई। उनकी बॉडी को देखकर आमिर खान भी दंग रह गये। आमिर ने उनकी बॉडी की तारीफ करते हुये कहा, अमेजिंग-अमेजिंग-अमेजिंग।

पाकिस्तान के लाहौर में जन्मे अमीर चंद को पहलवानी और बॉडी बिल्डिंग के गुण विरासत में मिले थे। उनके पिता एक जाने-माने पहलवान थे और उनको देख-देखकर ही अमीर चंद के मन में भी अच्छा शरीर बनाने की ललक जाग गई

लुधियाना के 83 वर्षीय इस नौजवान को देख अच्छे बॉडी बिल्डर भी दंग रह जाएंगे

अमीर चंद का कहना है कि लाहौर में 12 साल की उम्र में उन्होंने जूनियर चैंपियनशिप जीती थी। फिर 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद उनका परिवार लुधियाना आ कर बस गया। उन्होंने लुधियाना के सरकारी कॉलेज से स्नातक तक की शिक्षा पूर्ण की और यूको बैंक में बतौर क्लर्क अपने करियर की शुरुआत करके मैनेजर के तौर पर सेवामुक्त हुए। ख़ास बात ये थी कि बैंक के आलाधिकारियों ने उनकी स्पोर्ट्स क्वालिटी को देखते हुये बिना उनकी मंज़ूरी के उनके तबादले पर रोक लगा रखी थी, जिसकी वजह से अमीर हमेशा अपने शहर लुधियाना में ही रहे।

अमीर चंद का कहना है कि जवानी के दिनों में वो एक बार में एक हज़ार बैठक लगा लेते थे। उन्होंने बताया कि वो ताउम्र शाकाहारी रहे हैं और उन्होंने कभी फ़ूड सप्लीमेंट भी नहीं लिया। अमीर चंद के परिवार में उनके तीन बेटे हैं, जो लुधियाना में हौज़री इंडस्ट्री का काम करते हैं। बता दें कि अमीर चंद की चौथी पीढ़ी भी इस दुनियां में आ चुकी है, लेकिन उनका रोज़ाना रूटीन वैसा ही है, जैसा पहले था। 

अमीर चंद के हौसले का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है की कैंसर जैसी बीमारी भी उनके इरादे को नहीं डिगा सकी और 1984 में उन्होंने कैंसर को भी हरा दिया.

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