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बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

सुप्रीमकोर्ट दो बच्चों की नीति पर सुना सकता है ऐसा फैसला कि ओवैसी जैसों के होश उड़ जायेंगे ?

सुप्रीमकोर्ट दो बच्चों की नीति पर सुना सकता है ऐसा फैसला कि ओवैसी जैसों के होश उड़ जायेंगे ?

आमतौर पर हमारे देश में दो बच्चों को लेकर कई बार आवाज़ उठाई गयी है। ये आवाज़ इसलिए उठाई गयी है ताकि देश में जब आबादी कम होगी तो लोगों को सुविधाएँ ज्यादा मिल सकेंगी और हमारा देश तरक्की के मार्ग की ओर बढ़ सकेगा। वैसे तो आप सभी ने देखा होगा कि कई बार अच्छे से अच्छे और पढ़े लिखे आदमी को नौकरी नहीं मिल पाती हैं जिसके पीछे का कारण है देश में भारी आबादी।

यह बात तो है कि आखिर किस-किस को नौकरी मिलेगी जब सीटें ही कम हैं। देश में सबसे ज्यादा बच्चे मुस्लिम समुदाय के घरों में होते हैं, क्योंकि इनके यहाँ ज्यादा बच्चों का होना शुभ माना जाता है फिर चाहे घर में खाने को कुछ भी क्यों न हो। इस समुदाय के लोगों को अक्सर यह कहते हुए सुना गया है कि देश इनके साथ भेदभाव करता है जिसकी वजह से इनके बच्चों को कहीं भी रोजगार नहीं मिल पाता है।

इन्ही सभी समस्याओं को देखते हुए और जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं। दैनिक जागरण के मुताबिक इस याचिका में दो बच्चों की नीति अपनाने पर जोर देते हुए कहा गया है कि जो कोई भी इस निर्णय को मानेगा उसे प्रोत्साहन मिलेगा और जो नहीं मानेगा उसे दंड मिलेगा। 

आपको बता दें की एडवोकेट प्रिया शर्मा, अनुज सक्सेना और पृथ्वीराज चौहान ने अपनी इन याचिकाओं में कहा है कि इस तरह से जनसंख्या में वृद्धि होना हमें इस बात का संकेत देता है कि वर्ष 2022 तक भारत की आबादी 1.5 अरब पार कर चुकी होगी। इस याचिका में यह भी बताया गया है की इस तरह की बढती जनसंख्या का विस्फोट हमारे देश में  गरीबी, बेरोजगारी, खराब स्वास्थ्य, प्रदूषण, निरक्षरता तथा ग्लोबल वॉर्मिग के रूप में महसूस कराएगा जो कि करा भी रहा है।

इन याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है जिसमें प्रतिवादी केंद्र को एक ऐसी नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसी याचिकाओं में दो बच्चों की नीति का पालन करने वाले परिवारों को प्रोत्साहन मिलेगा और इसका उल्लंघन करने वालों को दंडित दिया जाये ऐसी बातें कही गयी हैं। अब ऐसे में अगर सुप्रीमकोर्ट इस याचिका के फेवर में अपना फैसला सुना देता है तो ओवैसे जैसे कट्टरपंथी राजनेता के होश उड़ना तय है। 

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि भारत दुनिया का सबसे युवा शक्ति वाला देश है लेकिन जनसंख्या विस्फोट के कारण युवाओं में बेरोजगारी है। साल 1951 मेंभारत की आबादी 36.1करोड़ थी, जो 2011 में बढ़कर 1.21 अरब हो गई. इस तरह से बढ़ती आबादी को देखते हुए साफ़ कहा जा सकता है कि इसी के कारण देश के सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और उसका लगातार क्षरण हो रहा है।

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