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Thursday, October 11, 2018

दोस्त ने की थी 250 रुपये की मदद तो साथी मजदूर ने दे दी 2 करोड़ के हीरे की आधी रकम

दोस्त ने की थी 250 रुपये की मदद तो साथी मजदूर ने दे दी 2 करोड़ के हीरे की आधी रकम

मध्यप्रदेश के पन्ना में करीब 2 करोड़ की कीमत का हीरा पाने वाले मजदूर मोतीलाल प्रजापति ने हीरे की नीलामी से मिलने वाली रकम का आधा हिस्सा अपने दोस्त रघुवीर प्रजापति से साझा करने का फैसला किया है। मोतीलाल प्रजापति ने फैसला लिया है कि वह हीरे से मिलने वाली रकम को अपने दोस्त के साथ बांटेगा। ताकि उसके परिवार के साथ ही उसके दोस्त का जीवन भी संवर सके।

मोतीलाल के मुताबिक 'मेरे दोस्त ने जरूरत पड़ने पर हमेशा ही मेरी मदद की है. उसकी आर्थिक स्थिति मुझसे भी खराब है, लेकिन इसके बाद भी उसने मुझे कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया। रघुवीर ने हमेशा मेरा साथ दिया है। इसलिए हीरे की नीलामी से मिलने वाली रकम को मैं उसके साथ बांटना चाहता हूं।'

दोस्त की आर्थिक स्थिति कमजोर
मोतीलाल के मुताबिक उसके दोस्त की आर्थिक स्थिति उससे भी ज्यादा खराब है और उसे मुझसे ज्यादा उन पैसों की जरूरत है। वहीं नीलामी से मिलने वाली रकम की बात करते हुए मोतीलाल ने कहा कि 'मुझे हीरे की नीलामी से मिलने वाले रुपयों के मेरे अकाउंट में ट्रांसफर होने का बेसब्री से इंतजार है। मैं पैसों के अकाउंट में ट्रांसफर होने को लेकर बेहद उत्सुक हूं। इन पैसों से मेरे परिवार का भविष्य संवरेगा और मुझे खुशी है कि यह रकम रघुवीर के काम भी आ पाएगी'।

आचार सहिंता के चलते नीलामी में देरी
बता दें प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के चलते मोतीलाल को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ सकता है। जिले के हीरा अधिकारी संतोष सिंह के मुताबिक अगर प्रदेश में चुनाव संहिता लागू न होती तो हीरे की रकम 15 दिनों के भीतर ही मोतीलाल के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती, लेकिन चुनावी दौर और आचार संहिता लागू होने के चलते उन्हें अभी इंतजार करना पड़ सकता है। बता दें आम तौर पर हीरे की नीलामी 15 दिनों के भीतर ही हो जाती है, लेकिन मोतीलाल को अभी इंतजार करना पड़ सकता है।

मंगलवार को मिला 42 कैरेट का हीरा
बता दें मोतीलाल को मंगलवार 9 अक्टूबर 2018 की सुबह 42 कैरेट 59 सेंट का बेशकीमती हीरा मिला था। जिसके बाद मोतीलाल के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई थी। बता दें पन्ना के इतिहास में यह दूसरी बार है जो किसी को इतना बड़ा और इतनी अच्छी क्वालिटी का हीरा मिला है। इससे पहले 57 साल पहले 1961 में पन्ना के रसूल मोहम्मद को 44 कैरेट का हीरा मिला था। वहीं हीरा मिलने के बाद मोतीलाल ने इसे पन्ना के हीरा कार्यालय लेजाकर सरकारी खजाने में जमा करा दिया था। नियम के अनुसार मजदूर से हीरा लेकर उसे सरकारी खजाने में रख दिया गया है और वहीं नीलामी के बाद रॉयल्टी हटाकर पूरी रकम मजदूर को दे दी जाएगी।

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