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शनिवार, 3 अक्तूबर 2020

लोन मोरेटोरियम पर केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा ब्याज पर ब्याज

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केंद्र सरकार ने बैंक से लोन लेने वालों को अच्छी खबर दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि अब लोगों को लोन ली गई राशि पर लग रहे ब्याज पर ब्याज नहीं देना होगा। एमएसएमई लोन, एजुकेशन, हाउसिंग, कंज्यूमर, ऑटो, क्रेडिट कार्ड बकाया और उपभोग लोन पर लगे सभी प्रकार के चक्रवृद्धि ब्याज को माफ़ किया जाएगा। इससे आमलोगों और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि लोन मोरेटोरियम पर 6 महीने की अवधि में 2 करोड़ रुपए तक की धनराशि पर लगने वाले ब्याज के ऊपर जो ब्याज लगता था, वो अब नहीं लगेगा। यानी, इन पर अब चक्रवृद्धि ब्याज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने कोरोना आपदा को देखते हुए छोटे कर्जदारों की मदद के लिए ये फैसला लिया है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण आई आपदा के बीच छोटे उद्योगों और मध्यम वर्ग के लोगों को जो मार पड़ी है, उसे देखते हुए ये उचित है कि सरकार ही कर्ज के ब्याज पर लगने वाला ब्याज वहन करे। ब्याज की छूट का भार अब सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार ने इसे ही मौजूदा ऋण समस्या का समाधान मानते हुए आश्वस्त किया है कि जल्द ही इसके लिए संसद से अनुमति ली जाएगी।

इस विषय में अनुदान के लिए संसद से अनुमति ली जाएगी। कोरोना आपदा को देखते हुए मार्च में जो लॉकडाउन लगाया गया था, उससे बाजार पर बड़ी मार पड़ी थी और सामान्य लोग ईएमआई भरने की स्थिति में नहीं थे। कमाई और कारोबार ठप्प होने के कारण कर्ज चुकाने में भी कई लोग सक्षम नहीं थे। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ऐसे लोगों से लोन न चुकाने के लिए बैंकों से 6 महीने की मोहलत दिलाई।

लेकिन, मोरेटोरियम के बदले लगने वाला अतिरिक्त चार्ज इन फैसलों की राह में सबसे बड़ी बाधा बन कर सामने आ रहा था, क्योंकि जो लोग ब्याज न देने की स्थिति में थे, वो ब्याज पर ब्याज कहाँ से देते? अब सरकार के इस फैसले के बाद मोरेटोरियम का लाभ ले रहे लोगों को ब्याज पर अतिरिक्त धनराशि खर्च नहीं करनी होगी। ग्राहकों को अब सिर्फ लोन पर सामान्य ब्याज ही देना होगा, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।

इसी साल अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी मोरेटोरियम मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार को हलफनामा दायर कर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कारोबार के साथ-साथ लोगों की परेशानियाँ देखने को भी कहा था। राजीव महर्षि वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार ने भी लोगों को राहत देने का मन बनाया।


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